the Why chromosome...

Saturday, August 14, 2010

क़मी

खुली हुई एक खिड़की से
मेरे कमरे में आज सवेरे
उड़ते हुए एक परिंदा चला आया

उसने मुझे
अंदर बैठे देखा
और मुड कर लौट गया

कुछ देर बाहर
एक
पेड़ की डाली पर बैठे हुए
वह मुझे देखता रहा
और फिर उड़ चला

जाते हुए जैसे कहता गया
खुली खिडकियों वाले कमरे
आसमाँ तो नहीं होते हैं ना

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